उत्तक किसे कहते हैं – परिभाषा, भेद, प्रकार, उदाहरण

आज हम इस लेख में जानेंगे की उत्तक किसे कहते है एवं इसके प्रकार कितने है। उत्तक का सामान्य भाषा में बात करे तो इसका अर्थ ‘‘ किसी भी शरीर में कोशिकाओं का वह समूह जो की उद्धव व कार्य की दृष्टि से समान हो, उत्तक कहलाता है।  ’’ 

हमारे पढने व लिखने के अनुसार तो उत्तक एक ही होती है लेकिन विज्ञान के अनुसार उत्तक को कई अनेक भागों में बांटा गया है। इसलिए हमें उत्तक क्या है इसे समझना चाहिए। आज का हमारा यह लेख आपको इस के बारे में अच्छे से समझायेगा की उत्तक क्या है एवं इसके कितने प्रकार होते है। 

उत्तक क्या है एवं इसके प्रकार के बारे में इस लेख में आपको पूरी जानकारी देने का प्रयास करेंगे। हम उम्मीद करते है की आपको हमारा ये लेख पसंद आएगा। जब हम बचपन में स्कूल में पढते थे तब से ही विज्ञान के बारे में पढते आ रहे है। 

इसके बावजूद भी ऐसे कई बिंदु है जो हमें उत्तक व विज्ञान के संदर्भ में समझ नही आते है। हमारे इसी लेख में उन्ही बिन्दुओं को समझाने का प्रयास कर रहे है। चलिये जानते है की उत्तक क्या है और इसके कितने प्रकार है –

उत्तक की परिभाषा

ऐसी कोशिकाएं है जो समान रूप से एक समान हो उनके समूह को उत्तक कहा जाता है, जो मिलकर किसी एक कार्य को सम्पत्र करते है। एक कोशिकीय जीवों, एवं कुछ निम्न वर्गों के जीवों के अलावा संपूर्ण जीव-जगत में कोशिकाएं आपस में संयोजित होकर एक महत्वपूर्ण ऊतक का निर्माण करती है, जो किसी विशेष प्रकार के कार्य को करने में काफी निर्गुण होते हैं। 

उत्तक के भेद

विज्ञान विषय में उत्तक को 4 प्रमुख भागों में बांटा गया है। यह उत्तक के प्रमुख 4 प्रकार है, इसका वर्णन आगे बताया गया है। 

उपकला ऊतक (Epithelial tissue)

उपकला ऊतक की रचना एक पतली झिल्ली की तरह हीं होती है, जो पादपो में विभिन्न संरचनाओं के बाहरी सतह पर आवरण के रूप में तथा साथ ही उनकी गुफाओं एवं नालियों में भीतरी स्तर के रूप में स्थापित सी रहती हैं। इसके अतिरिक्त ये ग्रंथि कोशिका के रूप में ग्रंथियों की रचना में भी मुख्य भाग लेता है। इस प्रकार के उत्तक की उत्पत्ति बाह्य त्वचा या अंतस्त्वचा से होती है तथा साधारण – इसकी कोशिकाएं एक ही पंक्ति में स्थित रहती हैं। ऐसी एक स्तरीय उपकला को सरल उपकला कहते हैं। परंतु कभी-कभी इसकी कोशिका अनेक शक्तियों में वृद्धि रहती हैं, जिन्हें स्तरित उपकला कहते हैं।

उपकला ऊतक के मुख्यत: तीन प्रकार होते हैं-

  • सरल उपकला।
  • स्तरित उपकला।
  • अस्थायी (Transitory) उपकला।

सरल उपकला का ही एक मुख्य प्रकार हैं- जिसमें शल्की उपकला, स्तंभाकार उपकला, ग्रंथीय उपकला, पक्ष्माभिकामय उपकला, संवेदी उपकला, वर्णक उपकला एवं भ्रूणीय उपकला इत्यादि होते है। 

संयोजी ऊतक (Connective tissue)

संयोजी ऊतक में अंतर कोशिकीय के द्रव्य इससे अधिक होते हैं। इस प्रकार के ऊतक का मुख्य कार्य अन्य ऊतकों एक प्रकार से को सहारा देना तथा उन्हें आपस में संयुक्त करना है। उपास्थि, अस्थि तथा रुधिर इत्यादि यह सभी इसी प्रकार के ऊतक हैं। रुधिर को तरल संयोजी ऊतक कहते हैं। प्रकार-

1. वसीय ऊतक 

2. पीत प्रत्यास्थ ऊतक 

3.तंतुमय ऊतक

पेशी ऊतक (Muscular tissue)

शरीर के मांसल भाग मुख्यतः पेशी ऊतक द्वारा बने होते हैं। इसमें अनेक लंबी तंतु के समान कोशिकाएँ संबद्ध रहती हैं। ये कोशिकाएं संकुचनशील होती हैं, जो तंतुओं को फैलने और सिकुड़ने की क्षमता प्रदान करती हैं। इसके मुख्यतः तीन प्रकार होते हैं-

  • अरेखित पेशी – इसे अनैच्छिक पेशी भी कहते हैं, क्योंकि इसकी क्रिया जंतु की इच्छा पर निर्भर नहीं होती। आहार नाल, रक्त वाहिनियों, फेफड़ों, पित्ताशय आदि की दीवारों में इस प्रकार के पेशी ऊतक मिलते हैं। इनकी कोशिका सरल, लंबी, तर्क्वाकार एवं अरेखित होती हैं।
  • रेखित पेशी – शरीर की अधिकांश पेशियाँ रेखित होती हैं। इनकी क्रिया जंतु की इच्छा शक्ति पर निर्भर करती है। रेखित पेशी के प्रत्येक जंतु की रचना लंबी तथा बेलनाकार कोशिकाओं द्वारा होती है। इस प्रकार के उत्तकों की शाखाएँ नहीं होतीं तथा इनके केंद्रों की संख्या भी काफी अधिक होती है। रेखित पेशी प्रकार के उत्तकं एकांत रूप में गहरे एवं हल्के रंग की अनेक अनुप्रस्थ पट्टियाँ स्थित रहती हैं।
  • हृदपेशी – हृदय के पेशी तंतु में रेखित एवं अरेखित दोनों प्रकार के तंतुओं के गुण एक ही समान के होते हैं। वही इनमें अनुप्रस्थ पट्टियाँ तो होती हैं पर ये अरेखित पेशियों के सदृश शाखामय एवं इसमें एक ही केंद्र वाली होती हैं। इनकी क्रिया अरेखित पेशियों के समान ही होती है।

तंत्रिका ऊतक (Nervous tissue)

इस प्रकार के ऊतक तंत्रिका तंत्र के विभिन्न अंगों की रचना करते हैं। संवेदनशीलता के लिए इस ऊतक की रचना में तंत्रिका कोशिका (Nerve cells) तथा तंत्रिका तंतु दोनों ही भाग लेते हैं। तंत्रिका कोशिका प्राय: अनियमित आकार की होती हैं, तथा इनके मध्य में बड़ा सा केंद्रक (Nucleus) होता है। 

निष्कर्ष

यहाँ हमने उत्तक क्या है एवं इसके साथ ही गणित के सभी प्रकारों की जानकारी दी है, अगर आपको हमारा यह आर्टिकल अच्छा लगा है तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें। अगर शब्द से जुड़ा किसी भी तरह का प्रश्न है तो आप यहाँ कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। हमें उम्मीद है की आप हमारा यह मेहनत भरा लेख अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करेंगे।

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