तत्सम शब्द – परिभाषा, भेद, प्रकार, उदाहरण

आज हम इस आर्टिकल में जानेंगे की तत्सम शब्द किसे कहते है एवं इसके प्रकार कितने है। तत्सम शब्द हिंदी में दो शब्द तत् + सम् से बना है जिसमें तत् का अर्थ होता है उसके, और सम् का अर्थ होता है ज्यों का त्यों। व्याकरण के अनुसार तत्सम शब्दों को अनेक प्रकारों में विभाजित किया गया है। इसलिए हमें तत्सम शब्द क्या है इसके बारे में समझना चाहिए। आज का हमारा यह आर्टिकल आपको यह अच्छे से समझाएगा की तत्सम शब्द क्या है एवं इसके प्रकार कितने है। 

तत्सम शब्द क्या है एवं इसके प्रकार के बारे में इस आर्टिकल में हम पूरी जानकारी देने का प्रयास करेंगे. हमें उम्मीद है की हमारी यह मेहनत आपको पसंद आएगी। हम स्कुल टाइम से ही विराम चिन्हं एंव व्याकरण के बारें में पढ़ते आ रहे है। फिर भी अनेक ऐसे पॉइंट्स है जो हमें तत्सम शब्द या व्याकरण के समझ नहीं आते हैं. हम उन्ही पॉइंट्स को यहाँ पर समझाने की एक मात्र कोशिश कर रहे हैं। आइये जानते है तत्सम शब्द क्या है एवं इसके प्रकार कितने है – 

तत्सम शब्द की परिभाषा ?

सामान्य तत्सम की बात करें तो यह दो शब्दों से मिलकर बना है तत – सम जिसका अर्थ होता है ‘‘ ज्यो का त्यो ’’ । यह वे शब्द है जिन्हें संस्कृत शब्दों में बिना कुछ परिवर्तन किये हिन्दी भाषा में शामिल किया गया है। हिन्दी व्याकरण में इस शब्दों की ध्वनि वैसे ही रहती है जैसे संस्कृत में होती है। ऐसे कुछ शब्दों के बारे में देखें तो ‘‘ हिंदी, बांग्ला, मराठी, गुजराती, पंजाबी’’ इत्यादि शब्द इसी श्रेणी में आते है। बदलते वक्त के साथ जिन शब्दों में परिवर्तन हुआ है उन्हें तद्भव शब्द कहा जाता है। 

तत्सम शब्दों के भेद

तत्सम शब्दों को मुख्य रूप से 4 भागों में बांटा गया है जिन चार प्रकारों का वर्णन आगे बताया गया है। 

उत्पत्ति / स्रोत / इतिहास के आधार पर

उत्पत्ति एवं स्रोतों के आधार पर तत्सम शब्दों को वापस 4 भागों में बांटा गया है जो इस प्रकार है। 

  • तत्सम शब्द – ऐसे तत्सम शब्दों जिनको ज्यों त्यों दूसरी भाषा से ग्रहण किया गया है। ऐसे शब्दों के उच्चारण की ध्वनि में कोई परिवर्तन नहीं होता है। इसके कुछ उदाहरण निम्न है – इस श्रेणी में संस्कृत के उन शब्दों को रखा जाता है जिन्हे संस्कृत या अन्य भाषा सें अधिग्रहण किया गया है। जैसे घोटक घोड़ा, बधिर बहरा इत्यादि। 
  • तद्भव शब्द – ऐसे शब्द जिनके उच्चारण में ध्वनि में परिवर्तन होता है, ऐसे शब्दों को तद्भव शब्दों की श्रेणी में रखा जाता है जैसे चन्द्र – चाँद, शर्करा – शक्कर इत्यादि। 
  • देशज या देशी शब्द – इस श्रेणी में वे तत्सम शब्द आते है जिनकी व्युत्पत्ति ध्वन्यात्मक अनुकरण से होती है परन्तु उत्पत्ति किसी तत्सम शब्द से नही होती है। जैसे तेंदुआ, भोंपू इत्यादि। 
  • विदेशज शब्द / विदेशी शब्द – किसी अन्य दूसरी भाषाओं से लिये गये शब्दों को विदेशी शब्द कहा जाता है। इस श्रेणी के शब्दों के उदाहरण निम्न है जैसे – कंपनी, कैंप इत्यादि।  

बनावट और रचना के आधार पर तत्सम शब्दों का विभाजन

इस श्रेणी के शब्दों को पुनः 3 भागों में बांटा गया है जो निम्न है – 

  • रूढ़ शब्द – इस श्रेणी में उन तत्सम शब्दों को रखा जाता है जिन शब्दों के सार्थक खंड न हो सके एवं ऐसे शब्द जो अन्य शब्दों के मेल से न बने हो जैसे पैर, रात, हाथ इत्यादि। 
  • यौगिक शब्द – यौगिक शब्द का अर्थ होता है ‘‘ मेल से बना हुआ ’’, ऐसे शब्द जो दूसरों के मेल से बने हो उन शब्दों को यौगिक शब्दों की संज्ञा दी जाती है। जैसे जन्मभूमि, पाठशाला इत्यादि शब्द। 
  • योगरूढ़ शब्द – ऐसे शब्द जो होते तो योगिक श्रेणी के परन्तु उनके अर्थ में रूढ यानि विशेष शब्द आता है। जैसे पंकज, पंक इत्यादि। 

रूप / प्रयोग के आधार पर विभाजन 

इस श्रेणी के शब्दों को वापस दो अन्य भागों में बांटा गया है जो निम्न है – 

  • विकारी शब्द – ऐसे शब्द जिनमे लिंग, वचन, कारक इत्यादि का बोध होता है उसे विकारी शब्द कहा जाता है। हिंदी में चार प्रकार के विकारी शब्द होते है जो निम्न है – 
    • संज्ञा – घोडा, घोडी इत्यादि। 
    • सर्वनाम – मै, मुझ, हम, हमें इत्यादि। 
    • विशेषण – अच्छा, अच्छी, अच्छे इत्यादि। 
    • क्रिया – पढता, पढूंगा, पढ़ा इत्यादि। 
  • अविकारी शब्द – इस श्रेणी में उन शब्दों को रखा जाता है जिनका प्रयोग मूल रूपों में होते हुए भी उनके लिंग, कारक इत्यादि में कोई परिवर्तन नहीं होता है जैसे अब, जब, यहां, वहां इत्यादि। 

शब्दों के अर्थ के आधार पर तत्सम शब्दों का विभाजन 

अर्थ के आधार पर तत्सम शब्दों को पुनः चार भागों में बांटा गया है। 

  • समानार्थी शब्द – ऐसे शब्द जिनका मतलब या अर्थ एक समान हो, ऐसे शब्दों को समानार्थक शब्द कहा जाता है जैसे  “ दिन – अहन, दिवा, दिवस, वार। ”
  • एकार्थक शब्द – ऐसे शब्द जिनका अर्थ एक ही होता है, ऐसे शब्दों को एकार्थक शब्द कहते है। जैसे गंगा, पटना, राधा इत्यादि। 
  • अनेकार्थी शब्द – ऐसे शब्द जिनमें एक से अधिक अर्थ होते है जिन्हे अनेकार्थी शब्द कहा जाता है। ऐसे शब्दों मे पर्यायवाची शब्दों को रखा जाता है। 
  • विपरीतार्थक शब्द – विपरीतार्थी शब्द – ऐसे शब्द जिनके विपरित अर्थ होते है जैसे विलोम शब्द – अज्ञ का विज्ञ इत्यादि। 

निष्कर्ष

यहाँ हमने तत्सम शब्द क्या है एवं उसके सभी प्रकारों की जानकारी दी है, अगर आपको हमारा यह आर्टिकल अच्छा लगा है तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें. अगर व्यंजन से जुड़ा किसी भी तरह का प्रश्न है तो आप यहाँ कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। हमें उम्मीद है की आप हमारी इस मेहनत को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करेंगे।

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