लिखित भाषा – परिभाषा, भेद, प्रकार, उदाहरण

आज हम इस लेख में जानेंगे की लिखित भाषा किसे कहते है एवं इसके प्रकार कितने है। लिखित भाषा का सामान्य भाषा में बात करें तो इसका अर्थ ‘‘ऐसी भाषा से है जिसे हम बोलने के साथ साथ लिख सके, ऐसी भाषा को लिखित भाषा कहा जाता है ’’ 

हमारे पढने व लिखने के अनुसार तो लिखित भाषा एक ही होती है लेकिन भाषा के अनुसार लिखित भाषा को कई अनेक भागों में बांटा गया है। इसलिए हमें लिखित भाषा क्या है इसे समझना चाहिए। आज का हमारा यह लेख आपको इस के बारे में अच्छे से समझायेगा की लिखित भाषा क्या है एवं इसके कितने प्रकार होते है। 

लिखित भाषा क्या है एवं इसके प्रकार के बारे में इस लेख में आपको पूरी जानकारी देने का प्रयास करेंगे। हम उम्मीद करते है की आपको हमारा ये लेख पसंद आएगा। जब हम बचपन में स्कूल में पढते थे तब से ही भाषा व्याकरण के बारे में पढते आ रहे है। 

इसके बावजूद भी ऐसे कई बिंदु है जो हमें लिखित भाषा एवं भाषा व्याकरण के संदर्भ में समझ नही आते है। हमारे इसी लेख में उन्ही बिन्दुओं को समझाने का प्रयास कर रहे है। चलिये जानते है की लिखित भाषा क्या है और इसके कितने प्रकार है –

लिखित भाषा की परिभाषा

कोई भी भाषा वह साधन है जिसके माध्यम से हम किसी भी बात को सोचते हैं और अपने मन के भावों और अपने मन के विचारों को व्यक्त करते हैं। जब हम अपने विचारों को बोलकर या उस भाषा को सुनकर व्यक्त करते हैं तो उसे ही भाषा के रूप से मौखिक भाषा कहा जाता है । जब हम अपने से दूर बैठे किसी भी व्यक्ति से अपने मन बातें एवं अपने मन के भावों को लिखकर व्यक्त करते हैं तो उसे लिखित भाषा कहते हैं। लिखित भाषा, भाषा का स्थायी रूप होता है।

लिखित भाषा का महत्त्व 

किसी भी भाषा में लिखित भाषा का काफी महत्व है। उच्चरित भाषा ही मनुष्य के एवं उसके जीवन के  समाजीकरण का आधार होती है लेकिन इससे किसी भी भाषा के  लिखित भाषा का महत्व कम नहीं हो जाता। लिखित भाषा सृजनात्मक साहित्य का एक माध्यम होती है जो किसी भी लिखित भाषा के लिए महत्वपूर्ण है । इस प्रकार की प्रत्येक भाषाई समाज में अपना एवं अपनी भाषा का एक विशिष्ट स्थान होता है।

भाषा के अन्य भाग 

भाषा को मुख्य रूप में 3 भागों में बाँटा जाता है। इस लिखी रूप के अलावा 2 भागों के बारे में आगे आपको बताया जा रहा है जो इस प्रकार है।

मौखिक भाषा 

यह रूप किसी भी भाषा का मूल रूप है और यह भाषा का सबसे प्राचीनतम रूप है। मौखिक भाषा का जन्म भी मानव की उत्पत्ति के साथ ही माना जाता है। जब की कोई मानव जन्म लेता है मानव जन्म के साथ साथ वह बोलना भी से शुरू कर देता है। जब कोई भी श्रोता सामने होता है तब मनुष्य द्वारा मौखिक भाषा का प्रयोग किया जाता है। जो मौखिक रूप की भी भाषा की आधारभूत इकाई होती है, उसे “ध्वनि“ के नाम से भी जाना जाता है। हमारे द्वारा बोली गई इन्ही ध्वनियों से शब्द बनते है जिनका वाक्यों जम वाक्यों में करते है। 

सांकेतिक भाषा 

इस प्रकार की भाषा में जिन संकेतों के माध्यम से किसी छोटे बच्चे को या ऐसे किसी गूंगे लोगो को  अपनी बात दुसरे को समझाने से  है तो इन संकेतो को सांकेतिक भाषा के रूप में देखा जाता है।  इस प्रकार की भाषा का अध्ययन किसी भी व्याकरण में नहीं किया जाता है। इस प्रकार की भाषा के कुछ उदाहरण- यातायात नियंत्रित करने वाली पुलिस, गूंगे बच्चों की वार्तालाप, छोटे बच्चों के इशारे इत्यादि इस प्रकार की भाषा के मुख्य उदाहरण है। 

भाषा का लिखित रूप 

जब कोई श्रोता सामने न हो तो उस तक अपनी किसी भी बात पहुँचाने के लिए मनुष्य को लिखित भाषा की ही मुख्य रूप से आवश्यकता पड़ती है। लिखित भाषा को सीखने के लिए कई सारे प्रयत्न और कई तरह से अभ्यास की जरूरत होती है। लिखित भाषा किसी भी भाषा का स्थायी रूप है, इस लिखित रूप से मध्यम से हम अपने भावों और अपने विचारों को आने वाली पीढ़ियों के लिए कथित तौर पर सुरक्षित रख सकते है।

किसी भी व्यक्ति को देख लो प्रत्येक व्यक्ति जन्म से ही अपनी मातृभाषा को सीख लेता है फिर चाहे वो बोलना सिख रहा हो या लिखना। अशिक्षित लोग भी अपने आसपास की अनेक भाषाएँ बोल और उन्हें समझ सकते है। किसी भी भाषा का सबसे मूल और मुख्य प्राचीन रूप मौखिक ही है।

निष्कर्ष

यहाँ हमने लिखित भाषा क्या है एवं इसके साथ ही गणित के सभी प्रकारों की जानकारी दी है, अगर आपको हमारा यह आर्टिकल अच्छा लगा है तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें। अगर लिखित भाषा से जुड़ा किसी भी तरह का प्रश्न है तो आप यहाँ कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। हमें उम्मीद है की आप हमारा यह मेहनत भरा लेख अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करेंगे।

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