कारक – परिभाषा, प्रकार, प्रयोग, उदाहरण

हिंदी व्याकरण की इस सीरिज में आज हम आपको बताने कारक क्या है? बताने वाले हैं, अगर आप हिंदी व्याकरण पढ़ते है तो आपको कारक से जुड़ी कुछ जानकारी पहले से ही होगी. लेकिन अगर आप कारक की सही पहचान नहीं कर पाते हैं या सही से समझ नहीं आ रहा है तो आज का हमारा यह आर्टिकल आपको कारक क्या है अच्छी तरह से समझा देगा. यदि आप हमारी वेबसाइट पर नए है तो मैं आपको बता दूँ की हम लगातार व्याकरण श्रेणी के आर्टिकल हमारी वेबसाइट पर अपडेट कर रहे है. इसलिए आप हमारे पुराने आर्टिकल भी पढ़ सकते है. 

कारक क्या है एंव इसके कितने भेद है यह सब जानकारी आपको इस आर्टिकल में मिलने वाली है. इसलिए अगर आप हिंदी व्याकरण में कारक क्या है को समझना चाहते है तो हम आपका 10 मिनट का समय जरुर लेंगे. लेकिन हम इस 10 मिनट के आर्टिकल में आपको कारक से जुड़ी सभी जानकारियां उदाहरण के साथ उपलब्ध करवाएंगे. इसलिए आपसे प्रार्थना है की आप यह आर्टिकल पूरा जरुर पढ़ें. ताकि हमारी मेहनत आपको अच्छी लगे और समझ में आये. चलिए पढ़ते है कारक क्या है ? – 

कारक की परिभाषा 

कारक की अनेक परिभाषा है लेकिन सभी का अर्थ एक ही होता है हम यहाँ कारक साधारण परिभाषा बता रहे है जो इस तरह है “वाक्य संज्ञा और सर्वनाम का क्रिया के साथ संबंध  ब्तालने वाले शब्द ही कारक कहलाते है.” यह शब्द – ने, को, के लिए, से, का, के, की, रे!, हो!, अरे! इत्यादि होते हैं. 

कारक के प्रकार एंव भेद 

संस्कृत में कारक की संख्या 8 है, जैसा की हम जानते है संस्कृत से ही हिंदी भाषा का निर्माण हुआ है इसलिए हिंदी में भी 8 प्रकार/भेद कारक माने जाते है यह इस तरह है – 

  1. कर्ता 
  2. कर्म
  3. करण 
  4. सम्प्रदान 
  5. अपादान 
  6. संबंध 
  7. अधिकरण 
  8. संबोधन 

कर्ता कारक के बारें में 

वाक्य का वह रूप जिसमे क्रिया करने वाले का बोध हो उसे कर्ता कारक कहते है. इस कारक की पहचान चिन्ह ‘ने’ है. आप इसे ऐसे भी समझ सकते है ऐसा वाक्य जिसमे कर्ता प्रधान हो तो उसमे कर्ता कारक का उपयोग होता है. इसमें ‘ने’ का उपयोग वर्तमानकाल और भविष्यकाल में नहीं होता है. अगर कोई बात भूतकाल की चल रही है तो ऐसे में इस कारक ‘ने’ का उपयोग होता है. 

उदाहरण 

  • रोहन स्कूल जाता है. 
  • विक्रम ने मेहनत करी. 
  • राजा ने रानी से विवाह किया. 
  • अर्जुन ने वादा किया. 
  • लोहार ने लड़ाई करी. 
  • खाती ने कुर्सी बनाई. 

इन सभी वाक्यों में ने का उपयोग हुआ है ऐसे ही वाक्य जिसमे कर्ता प्रधान हो उन वाक्यों को कर्ता कारक कहा जाता है. 

कर्म कारक के बारें में 

ऐसा वाक्य जिसमे कर्म प्रधान हो उसे कर्म कारक कहते है. इसे पहचान करने का चिन्ह ‘को’ है. बहुत बार ऐसे भी वाक्य आते है जिनमे ‘को’ का उपयोग नहीं होता है. लेकिन इसमें हमें यह समझना चाहिए की कर्म क्या हो रहा है. इनके अलावा – बुलाना, सुलाना, जगाना, भगाना, कोसना, पुकारना क्रियाओं में कर्म कारक लगता है. आप नीचे उदाहरण देखकर समझ जायेंगे. 

उदाहरण

  • कृष्ण ने कंस को मारा. 
  • माँ बच्चों को सुलाती है. 
  • मेरे गाँव वालो ने शेर को भगाया. 
  • राजन ने प्रिंसिपल को बुलाया. 

करण कारक के बारें में 

किसी वाक्य में क्रिया को करने के साधन (तरीके) का बोध हो उसे करण कारक कहा जाता है. इसकी पहचान करने के लिए हमें वाक्य में ‘से, द्वारा’ शब्दों को खोजना चाहिए. आप नीचे उदाहरण देखें – 

  • बंसती ने वीरू को गोली से मारा. 
  • बच्चे बल्ले से क्रिकेट खेल रहे हैं. 
  • गुलशन को दोस्त के द्वारा मरवाया गया.  
  • नेता हमेशा चापलूसों द्वारा जनता को बेवकूफ बनाते हैं.  

सम्प्रदान कारक के बारें में 

जिस वाक्य में किसी को कोई वस्तु देना, किसी के लिए कोई कार्य (क्रिया) करना पाया जाता है उसको सम्प्रदान कारक कहा जाता है. यानि ऐसा वाक्य जिसमे किसी के लिए कार्य होने का बोध हो उसमे सम्प्रदान कारक होता है. इसकी पहचान ‘को, के लिए, के हित, के वास्ते’ जैसे चिन्हों से होती है. 

उदाहरण 

  • राजू ने अपनी बहन के लिए गिफ्ट लिया. 
  • ब्राह्मणों ने राजा को ज्ञान दिया. 
  • अमित ने अनुष्का के लिए जान दी. 
  • अर्जुन ने कोरवों के लिए युद्ध किया. 
  • कृष्ण हमेशा पांडवों के हितकारी रहे. 

(सम्प्रदान का अर्थ होता है ‘देना’ यदि किसी वाक्य का अर्थ किसी से कोई वस्तु लेना या देना का अर्थ निकलता है तो ऐसे वाक्य में सम्प्रदान कारक का उपयोग होता है.) 

अपादान कारक के बारें में 

संज्ञा-सर्वनाम के जिस रूप में किसी चीज का किसी से अलग होना पाया जाए उसे अपादान कारक कहते हैं. इसका पहचान चिन्ह ‘से’ होता है. इसे आसानी से समझने के लिए आप उदाहरण देख सकते है. 

उदाहरण 

  • मीनाक्षी अपने परिवार से अलग हो गई है. 
  • पेड़ से फल टूट गया. 
  • अब मैं उस से अलग हो गया हूँ.
  • निकिता छत से गिर गई. 

(अपादान कारक की साधारण पहचान करने के लिए वाक्य को गौर से पढ़े और ध्यान दें की कहीं उसमे किसी से अलग होने का बोध तो नही हो रहा है. अगर अलग होने का बोध हो रहा है तो वह अपादान की श्रेणी में आता है. अकेले ‘से’ को देखकर किसी वाक्य में कोनसा कारक है उसकी पहचान करना मुश्किल होता है. क्योंकि करण कारक में भी ‘से’ का उपयोग होता है. )

संबंध कारक के बारें में 

किन्ही दो संज्ञा और सर्वनाम के मध्य संबंध बताने वाले शब्दों को संबंध कारक कहा जाता है. इनके पहचान चिन्ह “का, के, की, ने, ना, नो, रा, रे, री” है. यदि किसी वाक्य में किसी वस्तु का किसी से संबंध बताया जाए तो उसमे संबंध कारक होता है जैसे – 

उदाहरण – 

  • दशरथ का बेटा राम था. 
  • यह पेन्सिल गोकूल की है. 
  • अर्पिता सलमान की बहन है.
  • गुंजन की बहन बहुत रोती है. 

अधिकरण कारक के बारें में 

जिस वाक्य में क्रिया के आधार का बोध हो उसे अधिकरण कारक कहते है. इसकी पहचान इन शब्दों से की जाती है जैसे – पर, उपर, नीचे, मध्य, किनारे, आसरे, दिनों, यहाँ, वहाँ,समय,भीतर इत्यादि शब्द है. 

उदाहरण 

  • राम सागर किनारे घुमने जाता है. 
  • अंकित साइकिल पर पढने जाता है. 
  • दीवार पर घड़ी टंगी हुई है. 
  • उसका घर पहाड़ों के मध्य में हैं.
  • उस समय जब वो मेरे घर आये तब मैं वहां नहीं था. 
  • उसके भीतर जाना मना था. 

(ऐसा वाक्य जिसमे क्रिया का आधार यानि जगह, स्थान इत्यादि का बोध हो उसे अधिकरण कारक की श्रेणी में रखा जाता है.) 

संबोधन कारक के बारें में  

ऐसा वाक्य जिसमे किसी को बुलाने या पुकारने का भाव प्रकट हो, ऐसे शब्दों को संबोधन कारक कहते हैं. इनकी पहचान इन चिन्हों से की जा सकती है ‘अरे!, हे!, ओह!, शाबाश!, अजी!’ है. आप यह उदाहरण देखकर इसे सही से समझ पायेंगे – 

  • अरे! मेरे पास आओ. 
  • शाबाश! तुमने तो कमाल कर दिया. 
  • हे! राम तुम ही अब साहरा हो. 
  • अजी! सुनते हो जरा इधर आना. 
  • ओह! यह तो बहुत बुरा हुआ. 

(किसी वाक्य में अगर किसी को बुलाने, पुकारने इत्यादि का भाव उत्पन्न हो ऐसे वाक्य में संबोधन कारक ही होता है.) 

कारक के पहचान चिन्ह सारणी 

इस टेबल में हम सभी कारक की पहचान चिन्हों को सलंग्न कर रहे हैं. इससे आपको किसी भी कारक को समझने और पहचानने में मदद मिलेगी. 

कारक पहचान चिन्ह
कारक का नाम पहचान चिन्ह अर्थ 
कर्ता  ने क्रिया करने वाला. 
कर्म को क्रिया का प्रभाव जिसपर पड़ता है. 
करण से, के द्वारा क्रिया करने वाला साधन  
सम्प्रदान को, के लिएजिसके लिए क्रिया को किया जाए. 
अपादान से ( अलग होने का भाव) अलगाव या अलग होने का भाव प्रकट होना. 
संबंध का, की, के, ना, नि, रा, री, रे दो लोगों या संज्ञा में संबंध बताने वाला. 
अधिकरण में, पर क्रिया का आधार (स्थान, समय इत्यादि)  बोध करवाने वाला.
संबोधन हे!, अरे!, ओह! , शाबाश!, हे! किसी को बुलाने या पुकारने का भाव 

आप इस टेबल के माध्यम से कारक को समझ गये होंगे. इसके अलावा अनेक ऐसे तरीके है जिनकी मदद से कारक को आसानी से याद रखा जाता है और पहचान की जा सकती है. 

निष्कर्ष 

हमने इस आर्टिकल में आपको कारक क्या है यह कितने प्रकार का होता है के बारें में बताया है. आपको हमारा यह आर्टिकल कैसा लगा हमें कमेंट बॉक्स में जरुर बताएं. अगर आपको कारक से जुड़ा कोई प्रश्न पूछना है तो आप यहाँ पूछ सकते हैं. हम आपके प्रश्न का जवाब जल्द देने का प्रयास करेंगे. अगर आर्टिकल अच्छा लगा है तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें. 

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