काल किसे कहते हैं । काल के भेद, परिभाषा, उदाहरण

हम लगातर व्याकरण समझाने की कोशिश हमारी वेबसाइट पर कर रहे हैं, उम्मीद है आपको व्याकरण काफी अच्छे से समझ आ रही होगी. आज हम इस आर्टिकल में काल क्या है एंव काल के कितने भेद होते है उन्हें विस्तार से बताने वाले हैं. अगर आप काल क्या है और इसकी पहचान कैसे होती है समझना है तो इस आर्टिकल को पूरा जरुर पढ़ें. अगर आप इस आर्टिकल को पूरा पढ़ते है तो आपको काल क्या है एंव काल के भेद अच्छे से समझ आ जायेंगे. 

काल क्या है एंव इसके भेद की पहचान कैसे होती है इससे जुड़ा हमारा यह आर्टिकल आपकी काफी मदद करने वाला है. हमें उम्मीद है की हमारी यह कोशिश आपको पसंद आयेगी. अगर आप अन्य व्याकरण की जानकारी चाहते है तो हमारी वेबसाइट पर सभी व्याकरण के टॉपिक ऐड किये हुए है. आप उन्हें पढ़ सकते है. खैर अभी पढ़ते है ‘काल किसे कहते है एंव इसके प्रकार/भेद कौन-कौनसे है’- 

काल की परिभाषा 

काल की परिभाषा से पहले हमें काल का अर्थ समझना चाहिए, काल का अर्थ है – समय और इसी समय को व्याकरण में काल कहा गया है. इसकी परिभाषा की बात करें तो काल की परिभाषा इस तरह है “ क्रिया की जिस रूप में किसी काम के होने का समय ज्ञात हो उसे काल कहते है” जैसे – मैं अभी आर्टिकल लिख रहा हूँ, मैं कल खेलने में व्यस्त था. 

काल के भेद एंव प्रकार 

काल के तीन प्रकार के भेद है, यानि काल को तीन भेदों में विभाजित किया गया है. यह तीन भेद इस तरह है – 

  1. वर्तमान काल 
  2. भूतकाल 
  3. भविष्यकाल 

वर्तमान काल के बारें में 

क्रिया के जिस रूप में यह बोध हो की काम या क्रिया अभी हो रही है तो उसे वर्तमान काल कहा जाएगा. जैसे – राधा अभी गाना गा रही है, मैं अभी लिख ही रहा हूँ. इत्यादि. वर्तमान काल के तीन उपभेद है –

  • समान्य वर्तमान – यदि क्रिया वर्तमान में हो रही है और उसका समय ज्ञात हो उसे समान्य वर्तमान कहा जाता है जैसे – गोकुल गाय चराने जंगल जाता है, कविता बहुत अच्छी कॉफी बनाती है. 
  • अपूर्ण वर्तमान – क्रिया का वह रूप जिसमे यह ज्ञात हो की काम अभी चल रहा है, यानि काम अभी पूरा नहीं हुआ है या पूरा हो गया है लेकिन ज्ञात नहीं है तो उसे अपूर्ण वर्तमान कहा जाता है जैसे – मैं अभी लिख रहा हूँ, राधा सो रही है, गुंजन खाना खा रही है. 
  • संदिग्ध वर्तमान – क्रिया का वह रूप जिसमे काम हुआ है या नहीं उसमे संदेह हो उन्हें संदिग्ध वर्तमान कहा जाता है जैसे – माँ रोटी बना रही होगी, कृष्ण सो रहा होगा, वह पढने गया होगा.

भूतकाल के बारें में 

क्रिया के बीते हुए समय का बोध हो तो उसे भूतकाल कहते है. जैसे – कोमल नाचने गई, प्रतिज्ञा वकालत करने गई, अर्जुन ने पत्र लिखा. भूतकाल में छ: उपभेद होते है – 

  • सामान्य भूतकाल – क्रिया के जिस रूप में क्रिया का भूतकाल में होना पाया गया हो, उसे सामान्य भूतकाल कहा जाता है. जैसे – मोहन ने सुंदर गाना गाया, मोहन ने भाषण बहुत अच्छा दिया, गोकुल को उस रात बहुत डर लगा. इस तरह की क्रिया समान्य भूतकाल में आती है. 
  • आसन्न भूतकाल – क्रिया का वह रूप जो भूतकाल में शुरू हुई और अभी-अभी खत्म हुई है ऐसी स्थिति को आसन्न भूतकाल में सम्मलित किया जाता है जैसे – मैं गाना गा चूका हूँ, मुझे स्टेज पर बुला लिया गया है, मैं ऑफिस जा चूका हूँ. 
  • पूर्ण भूतकाल – क्रिया का वह रूप जिसमे काम का बहुत समय पहले बीत जाने का बोध हो, उन्हें पूर्ण भूतकाल कहते है जैसे – जब वह मेरे ऑफिस आया मैं ऑफिस से निकल चूका था. जबतक मैं ब्लड लेकर जाता तब तक उसकी माँ गुजर चुकी थी, उस दिन बहुत अँधेरी रात थी. 
  • अपूर्ण भूतकाल – क्रिया का वह रूप जिसमे कार्य शुरू तो हुआ भूतकाल में लेकिन वह पूरा हुआ या नहीं वह अभी तक ज्ञात ना हो ऐसी स्थिति को अपूर्ण भूतकाल में रखा जाता है जैसे – मैं जब घर से निकला तो वो मंदिर के लिए जा रही थी. मैंने उसे रस्ते में किसी से बात करते हुए देखा था, जब मैंने उसे देखा वो सो रहा था. 
  • हेतुहेतुमद् भूतकाल – क्रिया का ऐसा रूप जिसमे भूतकाल की क्रिया किसी दुसरे पर आश्रित हो उन्हें हेतुहेतुमद् भूतकाल कहा जाता है जैसे – अगर वह पढ़ता तो आज विदेश में नौकरी करता, उसने मुझे देखा होता तो वह रुक जाती. वह नौकरी करता तो आज बड़ा आदमी बन जाता. 

भविष्यकाल के बारें में 

क्रिया का वह रूप जिसमे उसके होने का आने वाला समय पता हो यानि वह भविष्य में कब और किस दिन होने वाली है यह ज्ञात हो उसे भविष्यकाल कहते है. जैसे – कल वर्षों बाद वह मुझसे मिलेगी, मैं बहुत जल्द पिता बनने वाला हूँ, मेरे दोस्त की दो दिन बाद शादी है. भविष्य काल के दो भेद है –

  • समान्य भविष्यकाल – क्रिया के उस रूप में जिसमे क्रिया के होने का आने वाला समय ज्ञात हो और उस समय में क्रिया होनी पाई जाए इसे समान्य भविष्यकाल कहा जाता है. साधारण भाषा में कहे तो जो क्रिया भविष्य में होनी तय है यानि उसे बदला नहीं जायेगा उसे समान्य भविष्यकाल कहा जा सकता है जैसे – हम आज जरुर खेलने जायेंगे, आज कल पूरा दिन इन्टरनेट बंद रहेंगे. 
  • संभाव्य भविष्यकाल – क्रिया का वह रूप जिसमे उसके होने की संभावना हो, यानि उसका सही समय आदि हमें ज्ञात ना हो ऐसे रूप को हम संभाव्य भविष्यकाल कह सकते है जैसे – ‘मैं पिता बनने वाला हूँ’ – मैं पिता तो बनने वाला हूँ लेकिन कब और किस दिन यह ज्ञात नहीं है सिर्फ संभावनाएँ है. ‘शायद आज किसी लड़की से मुलाकत हो जाए’ – यहाँ पर भी संभावनाए है की हो सकता है कोई लड़की आज मिल जाए लेकिन कब मिलेगी या नहीं मिलेगी यह संशय बना हुआ है. 

निष्कर्ष 

इस आर्टिकल में हमने काल क्या है एंव काल के सभी भेदों के बारें में विस्तार से बताया है. उम्मीद है आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा. अगर पसंद आया है तो अपने दोस्तों के साथ इसे शेयर जरुर करें ताकि उन्हें भी पता चले की काल क्या है? अगर काल से जुड़ा कोई प्रश्न है तो आप कमेंट बॉक्स में जरुर पूछे हम आपके प्रश्न का जवाब जल्द से जल्द देंगे. 

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